इंदिरा क्या उनके अब्बू नेहरू की भी नहीं थी पटेल के सामने कोई हैसियत, सिर्फ गाँधी के कारण था नेहरू



अभी कुछ ही दिनों पहले एक कांग्रेस का प्रवक्ता एक निजी चैनल पर बेशर्मी की हदें पार कर रहा था, गाँधी नेहरू परिवार की चाटुकारिता में कोंग्रेसी नेता किसी भी नीच स्तिथि तक जाने को तैयार है, अलोक शर्मा नाम के कोंग्रेसी प्रवक्ता ने ये तक कह दिया की इंदिरा गाँधी सरदार पटेल से बड़ी नेता थी, सरदार पटेल इंदिरा से छोटे नेता थे 

पहली चीज तो ये की सरदार पटेल परिवारवाद के प्रोडक्ट नहीं थे, इंदिरा तो नेहरू की संतान थी इसलिए प्रधानमंत्री बनी, अगर नेहरू की संतान न होती तो कोई उन्हें जनता भी नहीं, वो तो ऐसी महिला थी जिसे रबीन्द्रनाथ टैगोर ने ख़राब मानसिकता के कारण अपने स्कुल से निकाल दिया था 

तो कोंग्रेसी नेता कह रहा था की इंदिरा पटेल से बड़ी नेता थी, पटेल तो इंदिरा से छोटे नेता थे, आज हम आपके सामने ये ऊपर वाली तस्वीर लेकर आये है, देखिये इंडोनेशिया से मेहमान आये हुए  थे, पटेल के सामने इंदिरा तो छोड़िये उसके अब्बू नेहरू की क्या हैसियत थी ये आप तस्वीर को देखकर समझ सकते है 

आपको बता दें की इंदिरा की तो बात ही क्या, नेहरू की भी पटेल के सामने चींटी भर भी हैसियत नहीं थी, जब भारत आज़ाद नहीं हुआ था, तभी से पुरे देश में कांग्रेस के नेताओं पर पटेल की पकड़ थी, नेहरू को तो कोई पूछता भी नहीं था, नेहरू सिर्फ मोहनदास गाँधी की चाटुकारिता में रहता था, या विदेशी महिलाओं के साथ लगा रहता था, नेहरू की कोई राजनीतिक पकड़ नहीं थी 

जब भारत का प्रधानमंत्री चुनने की बारी आयी, चुनाव नहीं हुए थे, तो कांग्रेस की समितियों से, देश भर में फैले कोंग्रेसी नेताओं से राय मांगी गयी थी, वोट मांगे गए थे, देश भर के कांग्रेस नेताओं ने नेहरू को नहीं पटेल को प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट दिया था, केंद्रीय कांग्रेस समिति के भी 95% वोट पटेल को मिले थे, पटेल के सामने नेहरू की तो कोई हैसियत ही नहीं थी 

पर नेहरू के काम गाँधी आया, गाँधी के कारण नेहरू प्रधानमंत्री बना, वरना नेहरू की तो इतनी भी हैसियत नहीं थी की वो कांग्रेस के नेताओं का ही वोट ले पाता, 14 में से 13 वोट पटेल को मिले थे, नेहरू ने खुद को अपना वोट दिया था, नेहरू की ये हैसियत थी पटेल के सामने, नेहरू सिर्फ गाँधी के कारण था, अन्यथा न नेहरू की कोई हैसियत थी, न कोई राजनितिक कद, पटेल इंदिरा की तो बात ही छोड़िये, इंदिरा के अब्बू नेहरू से भी कई गुना बड़े नेता थे, उनके पास ज्यादा लोकप्रियता थी

1950 में पटेल का देहांत हो गया, नेहरू प्रधानमंत्री था, उसके पास गाँधी के कारण सत्ता थी तो उसने अपना खेल जमा लिया, और आज उसके खानदान के लोग कांग्रेस पर अधिकार कर बैठे है, अगली बार कोई कांग्रेसी कहेगा की इंदिरा या नेहरू पटेल से बड़े नेता थे, तो ये तस्वीर और ये जानकारी उसके मुँह पर आप मार सकते है