आपकी जानकारी के लिए बता दें की लाहौर कराची फैसलाबाद में रहने वाले हिन्दू काफी अमीर थे, आज जो पाकिस्तान हैं, वो 1947 से पहले भारत था, और उस इलाके में रहने वाले हिन्दू अमीर थे, जनसँख्या इन इलाकों में मुस्लिमो की ज्यादा थी, पर सारा व्यापार, कोठियां सबकुछ हिन्दुओ की थी
1947 में धर्म के आधार पर बंटवारा हुआ, पर ये बंटवारा काम और हिन्दुओ के खिलाफ जिहाद ज्यादा था, और ऐसा भयानक भेदभाव किया गया जिसकी आप कल्पना तक नहीं कर सकते की इतना खुला भेदभाव कैसे किया जा सकता है, और ऐसा भेदभाव करने के बाद भी मोहनदास गाँधी राष्ट्रपिता कहलाता है, और नेहरू देश का चाचा बना दिया गया
अब यहाँ से करोडो मुस्लिम पाकिस्तान की ओर गए और वहां से करोडो हिन्दू भारत की तरफ आये, अब जितना कुछ ले जा सकते थे दोनों तरफ के लोग लेकर गए, पर जमीन तो लेकर नहीं जा सकते, वो यहीं छोड़ना पड़ा, पाकिस्तान से भारत में जितने हिन्दू आये वो अपनी जमीन वहीँ छोड़ आये और भारत से पाकिस्तान में जितने मुस्लिम गए वो यहाँ अपनी जमीन छोड़ गए, उसके बाद क्या हुआ देखिये

हिन्दू जो जमीन पाकिस्तान में छोड़कर आये उसपर वहां के मुसलमानो या भारत से गए मुसलमानो का कब्ज़ा हो गया, हिन्दुओ की जमीन मुसलमानो को दे दी गयी, पर यहाँ भारत में जो जमीन मुसलमान छोड़कर पाकिस्तान गए थे, वो जमीन पाकिस्तान से आये हिन्दुओ को मिलनी चाहिए थी पर ऐसा नहीं किया नेहरू गाँधी ने, हिन्दुओ को जमीन नहीं मिली, वो जमीन भी मुसलमानो को दे दी गयी, वक्फ बोर्ड को दे दी गयी
पाकिस्तान में हिन्दुओ की जमीन मुसलमानो को मिली, और भारत में भी मुस्लिमो की जमीन वक्फ बोर्ड के जरिये मुसलमानो को ही मिली, हिन्दुओ के खिलाफ खुलकर जिहाद और भेदभाव किया गया, और इतना खुलेआम अत्याचार और भेदभाव के बाद भी मोहनदास गाँधी राष्ट्रपिता बन गया तो जवाहर लाल नेहरू चाचा कहलाता है
