इंदिरा मांग रही थी बाबर के लिए दुवा, तो सोनिया करती है हिन्दुओ से नफ़रत, दोनों खुलासे कोंग्रेसियों द्वारा


सोनिया गाँधी और इंदिरा गाँधी के बारे में ये दोनों जानकारियां हमारी रिसर्च नहीं है, न ही किसी विपक्षी दल के नेताओं ने ये जानकारियां दी है, ये जानकारियां तो खुद कांग्रेस और उसके नेताओं ने दी है, जो सोनिया गाँधी और इंदिरा गाँधी के करीब थे 

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पूर्व राष्ट्रपति, पूर्व विदेश मंत्री और कई अन्य पदों पर रह चुके प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब "द कोइलशन इयर्स" में बताया की सोनिया गाँधी हिन्दुओ से सख्त नफरत करती है, और इसी के कारण हिन्दू धर्मगुरु कांची शंकराचार्य को दीपावली के दिन गिरफ्तार किया गया था, वो साजिश थी ताकि हिन्दुओ को नीचा दिखाया जा सके, वो निर्दोष थे फिर भी हिन्दुओ से नफरत के चलते उनको गिरफ्तार किया गया था 

प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब में ये भी बताया था की उन्होंने सोनिया गाँधी के सामने इसका विरोध किया था पर उन्होंने एक भी बात नहीं सुनी और जयललिता को कहकर शंकराचार्य को गिरफ्तार करवाया गया, ये सबकुछ हिन्दुओ के प्रति नफरत के कारण सोनिया गाँधी ने करवाया 

ये तो रही प्रणब मुखर्जी की बात, अब हम आपको एक और पूर्व विदेशमंत्री नटवर सिंह की बात बताते है, नटवर सिंह भी कांग्रेस नेता था, पूर्व विदेश मंत्री थे और उस से पहले इंदिरा गाँधी के ज़माने में विदेश सेवाओं में अफसर भी थे 

हमने इंदिरा गाँधी की इस हरकत के बारे में दैनिक भारत के पाठकों को पहले भी बताया था, आज फिर हम हूबहू वही लेख नीचे दे रहे है जिसे आप विस्तारपूर्वक पढ़कर समझ सकते है

नोट : बता दें की नटवर सिंह इंदिरा गाँधी के समय प्रशासनिक अफसर थे, फिर कांग्रेस में शामिल हुए और विदेश मंत्री भी बनाये गए, कांग्रेस ने इंदिरा गाँधी को एक बहुत ही जिम्मेदार , ताकतवर और राष्ट्रभक्त महिला बताया हैं , चलिए इसकी कुछ कडवी हकीकत से मैं भी आज आपको रूबरू करवाते हैं 

इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू राजवंश में अनैतिकता को नयी ऊँचाई पर पहुचाया. बौद्धिक इंदिरा को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था लेकिन वहाँ से जल्दी ही पढाई में खराब प्रदर्शन के कारण बाहर निकाल दी गयी. उसके बाद उनको शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था, लेकिन गुरु देव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें उसके दुराचरण के लिए बाहर कर दिया

.शान्तिनिकेतन से बहार निकाल जाने के बाद इंदिरा अकेली हो गयी. राजनीतिज्ञ के रूप में पिता राजनीति के साथ व्यस्त था और मां तपेदिक के स्विट्जरलैंड में मर रही थी. उनके इस अकेलेपन का फायदा फ़िरोज़ खान नाम के व्यापारी ने उठाया. फ़िरोज़ खान मोतीलाल नेहरु के घर पे मेहेंगी विदेशी शराब की आपूर्ति किया करता था. फ़िरोज़ खान और इंदिरा के बीच प्रेम सम्बन्ध स्थापित हो गए. महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल डा. श्रीप्रकाश नेहरू ने चेतावनी दी, कि फिरोज खान के साथ अवैध संबंध बना रहा था.

फिरोज खान इंग्लैंड में तो था और इंदिरा के प्रति उसकी बहुत सहानुभूति थी. जल्द ही वह अपने धर्म का त्याग कर, एक मुस्लिम महिला बनीं और लंदन के एक मस्जिद में फिरोज खान से उसकी शादी हो गयी. इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू ने नया नाम मैमुना बेगम रख लिया. उनकी मां कमला नेहरू इस शादी से काफी नाराज़ थी जिसके कारण उनकी तबियत और ज्यादा बिगड़ गयी. नेहरू भी इस धर्म रूपांतरण से खुश नहीं थे क्युकी इससे इंदिरा के प्रधानमंत्री बन्ने की सम्भावना खतरे में आ गयी.

तो, नेहरू ने युवा फिरोज खान से कहा कि अपना उपनाम खान से गांधी कर लो. परन्तु इसका इस्लाम से हिंदू धर्म में परिवर्तन के साथ कोई लेना – देना नहीं था. यह सिर्फ एक शपथ पत्र द्वारा नाम परिवर्तन का एक मामला था. और फिरोज खान फिरोज गांधी बन गया है, हालांकि यह बिस्मिल्लाह शर्मा की तरह एक असंगत नाम है. दोनों ने ही भारत की जनता को मूर्ख बनाने के लिए नाम बदला था. 

जब वे भारत लौटे, एक नकली वैदिक विवाह जनता के उपभोग के लिए स्थापित किया गया था. इस प्रकार, इंदिरा और उसके वंश को काल्पनिक नाम गांधी मिला. नेहरू और गांधी दोनों फैंसी नाम हैं. जैसे एक गिरगिट अपना रंग बदलती है, वैसे ही इन लोगो ने अपनी असली पहचान छुपाने के लिए नाम बदले.

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के.एन. राव की पुस्तक “नेहरू राजवंश” (10:8186092005 ISBN) में यह स्पष्ट रूप से लिखा गया है संजय गांधी फ़िरोज़ गांधी का पुत्र नहीं था, जिसकी पुष्टि के लिए उस पुस्तक में अनेक तथ्यों को सामने रखा गया है. उसमे यह साफ़ तौर पे लिखा हुआ है की संजय गाँधी एक और मुस्लिम मोहम्मद यूनुस नामक सज्जन का बेटा था. दिलचस्प बात यह है की एक सिख लड़की मेनका का विवाह भी संजय गाँधी के साथ मोहम्मद यूनुस के घर में ही हुआ था.

मोहम्मद यूनुस ही वह व्यक्ति था जो संजय गाँधी की विमान दुर्घटना के बाद सबसे ज्यादा रोया था. ‘यूनुस की पुस्तक “व्यक्ति जुनून और राजनीति” (persons passions and politics )(ISBN-10: 0706910176) में साफ़ लिखा हुआ है की संजय गाँधी के जन्म के बाद उनका खतना पूरे मुस्लिम रीति रिवाज़ के साथ किया गया था. कैथरीन फ्रैंक की पुस्तक “the life of Indira Nehru Gandhi (ISBN: 9780007259304) में इंदिरा गांधी के अन्य प्रेम संबंधों के कुछ पर प्रकाश डाला है. यह लिखा है कि इंदिरा का पहला प्यार शान्तिनिकेतन में जर्मन शिक्षक के साथ था. 

बाद में वह एमओ मथाई, (पिता के सचिव) धीरेंद्र ब्रह्मचारी (उनके योग शिक्षक) के साथ और दिनेश सिंह (विदेश मंत्री) के साथ भी अपने प्रेम संबंधो के लिए प्रसिद्द हुई.पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने इंदिरा गांधी के मुगलों के लिए संबंध के बारे में एक दिलचस्प रहस्योद्घाटन किया, अपनी पुस्तक “profiles and letters ” (ISBN: 8129102358) में किया. यह कहा गया है कि 1968 में इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री के रूप में अफगानिस्तान की सरकारी यात्रा पर गयी थी .

नटवर सिंह एक IFS अधिकारी के रूप में इस दौरे पे गए थे. दिन भर के कार्यक्रमों के होने के बाद इंदिरा गांधी को शाम में सैर के लिए बाहर जाना था . कार में एक लंबी दूरी जाने के बाद, इंदिरा गांधी बाबर की कब्रगाह के दर्शन करना चाहती थी, हालांकि यह इस यात्रा कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया. अफगान सुरक्षा अधिकारियों ने उनकी इस इच्छा पर आपत्ति जताई पर इंदिरा अपनी जिद पर अड़ी रही . अंत में वह उस कब्रगाह पर गयी . यह एक सुनसान जगह थी. वह बाबर की कब्र पर सर झुका कर आँखें बंद करके काफी देर तक खड़ी रही और नटवर सिंह उसके पीछे खड़े थे .

इंदिरा ने आँख बंद करके बाबर की कब्र पर कहा की, "तुम्हारे वंशजो के हाथ में आज भारत है"
 जब इंदिरा ने उसकी प्रार्थना समाप्त कर ली तब वह मुड़कर नटवर से बोली “आज मैंने अपने इतिहास को ताज़ा कर लिया (Today we have had our brush with history “. नटवर सिंह कहते है की, बाबर की कब्र पर जो वाक्या हुआ उसे देख मैं हैरान था, यहाँ आपको यह बता दे की बाबर मुग़ल साम्राज्य का संस्थापक था, और नेहरु खानदान इसी मुग़ल साम्राज्य से उत्पन्न हुआ. इतने सालो से भारतीय जनता इसी धोखे में है की नेहरु एक कश्मीरी पंडित था….जो की सरासर गलत तथ्य है…..कांग्रेस की ये काली हकीकत जानने का हक़ सभी भारतियों को है 

तो इंदिरा गाँधी बाबर के लिए उसकी कब्र पर माथा झुकाकर दुवा मांग रही थी, और सोनिया गाँधी हिन्दुओ से नफरत करती है, और ये खुले भी कांग्रेस के नेताओं ने ही किये है, पर हिन्दू समाज अब भी ये तय नहीं कर सका है की कांग्रेस उसके लिए कितनी खतरनाक है

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