सिखों के नरसंहार पर काला दिवस नहीं मना पाए मनमोहन, नोटबंदी पर मनाते है : तजिंदर बग्गा



8 नवंबर को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी बाकि कोंग्रेसियों की तरह नोटबंदी का विरोध किया और काला दिवस मनाया, मनमोहन सिंह ने नोटबंदी के खिलाफ मुँह खोला, पर यही मनमोहन सिंह आजतक दिल्ली में हुए सिखों के कत्लेआम के खिलाफ मुँह नहीं खोल पाए

बीजेपी के नेता तजिंदर बग्गा ने भी मनमोहन सिंह पर करारा हमला किया, और वाकई उन्होंने बहुत तर्कपूर्ण बात कही, क्यूंकि मनमोहन सिंह तो कथित तौर पर सिख ही है, पर सिखों के कत्लेआम पर मनमोहन सिंह ने आजतक मुँह नहीं खोला, क्यूंकि वो कत्लेआम राजीव गाँधी ने करवाया था, और मनमोहन सिंह तो सिख बाद में इस परिवार के  गुलाम पहले है, और ऐसा तो सारा देश ही कहता है 

देखिये बग्गा ने आज क्या ट्वीट किया, और बग्गा भी स्वयं एक सिख है, उनकी भावनाओं को समझा जा सकता है, वो भी दिल्ली के ही रहने वाले है, जाहिर सी बात है  कम से कम उनका परिवार 1984 वाले हालातों से गुजरा होगा, देखिये बग्गा का ट्वीट

बग्गा का कहना है की नोटबंदी को मनमोहन सिंह काला दिवस बताते है, और उसे काले दिवस के रूप में उन्होंने मनाया भी, उन्होंने अपना मुँह भी खोला, पर कुछ ही दिनों पहले 31 अक्टूबर भी था, और राजीव गाँधी ने 1984 में 31 अक्टूबर के दिन ही दिल्ली में सिखों का कोंग्रेसियों द्वारा कत्लेआम भी करवाया था, पर मनमोहन सिंह 5000 से ज्यादा सिखों के कत्लेआम के खिलाफ कभी काला दिवस नहीं मना सके

इसका एकमात्र कारण यही हो सकता है की मनमोहन सिंह जैसा शख्स सिख सिर्फ नजर आता है, ये शख्स सिख नहीं बल्कि एक पार्टी का बंधुवा मजदुर है, और प्रधानमंत्री रहते हुए भी 10 साल इस शख्स ने एक विदेशी महिला की गुलामी ही की है