अल्पसंख्यक हिन्दुओ को अल्पसंख्यक का दर्जा, जी हां आपने सही पढ़ा अल्पसंख्यक हिन्दुओ को अल्पसंख्यक का दर्जा देने से सुप्रीम कोर्ट ने इंकार कर दिया है, याचिका को सुनने तक से मना कर दिया है और याचिका को बिना सुनवाई ही खारिज कर दिया है
भारत के 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हिन्दू अल्पसंख्यक है, असल में हिन्दू अल्पसंख्यक है, जम्मू कश्मीर, लक्षद्वीप, पंजाब, मिजोरम, नागालैंड, मेघालय, अरुणांचल प्रदेश और मणिपुर, इन सभी इलाकों में हिन्दू अल्पसंख्यक है, फिर भी हिन्दुओ को बहुसंख्यक माना जाता है, और अल्पसंख्यकों के लाभ उन्हें मिलते है जो असल में बहुसंख्यक है
बीजेपी नेता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसमे उन्होंने इन 8 राज्यों में हिन्दुओ को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की मांग करी थी, पहली ही सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया, सुनवाई तक से इंकार कर दिया
Plea seeking minority status for Hindus in several states: Supreme Court refuses to entertain the case, asks the petitioner to approach National Commission for Minorities.— ANI (@ANI) November 10, 2017
याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट ने कहा की, हम इस याचिका को नहीं सुनेंगे, तुम अल्पसंख्यक आयोग जाओ और वहां बात करो, सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दुओ को अल्पसंखयक का दर्जा देना तो दूर सुनवाई से भी इंकार कर दिया
आपकी जानकारी के लिए बता दें की ये वही सुप्रीम कोर्ट है जिसके सामने अगर आप दीपावली पर पटाखे बैन करने की मांग लेकर जाते है तो उसपर कोर्ट सुनवाई करता है, ये नहीं कहता की पर्यावरण मंत्रालय के पास जाओ, पर जब याचिका आती है की अल्पसंख्यक हिन्दुओ को अल्पसंख्यक का दर्जा तो मिले, तो जज कहते है की अल्पसंख्यक आयोग के पास जाओ, और याचिका को ख़ारिज कर देते है
