आपने लुटेरों की खूब तारीफें पढ़ी होंगी, हम मुगलों की बात कर रहे है, हमारे देश के सेक्युलर और वामपंथी तो खूब तारीफ लिखते है इनकी, कहते है की इन्होने पुरे भारत पर राज किया, पर असल में मुग़ल सिर्फ उत्तर भारत तक ही सिमित थे, इन्होने केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र पर कभी भी राज नहीं किया, इन्होने असम, ओड़िसा पर कभी राज नहीं किया, इन्होने कर्णाटक, तेलंगाना आंध्रा पर कभी राज नहीं किया
पर क्या है की हमारे वामपंथी और सेक्युलर इतिहासकार इन्ही मुगलों के हरम से उत्पन्न हुए है इसलिए इन मुगलों की खूब तारीफ लिखते है, ये इतिहासकार कभी नहीं बताएँगे की अकबर जिसे जहांगीर ने आगरा में दफ़न कर दिया था, औरंगजेब के टाइम में मुगली सेना को काटकर भरतपुर के राजा राम जाट ने अकबर की हड्डियों को कब्र से निकालकर जला दिया था, औरंगजेब कुछ नहीं कर पाया था
और न ही ये इतिहासकार बताएँगे की किस प्रकार आखिरी लुटेरा बहादुर शाह जफ़र दिल्ली छोड़ बर्मा भाग गया था, असल में 1857 के बाद लाल किले में रहने वाला बहादुर शाह ज़फर अपनी तमाम बेगमों को यही छोड़कर अंग्रेजों से डरकर बर्मा भाग गया था, जहाँ रंगून में अंग्रजों ने उसे पकड़ मार दिया
इतना कायर था की बेगमो तक को लाल किले में ही छोड़कर भाग गया था, बस कुछ सैनिक छोड़ गया था, फिर जिहाद की प्रवित्ति से युक्त इन मुगली सैनिको ने दिल्ली में हिन्दुओ पर हमला बोल दिया, फिर क्या था दिल्ली के गुर्जर हिन्दुओ ने मुगली सेना को गाजर मूली की तरह काट दिया, और लाल किले में मौजूद सभी मुगली बेगमों को उठा लिया
पुरे मुग़ल कायरता पर ही ठीके हुए थे, यहाँ के जयचंदों ने बाबर, हुमायूँ, अकबर, औरंगजेब, जहांगीर, शाहजहां इन सभी का साथ दिया था, इन सभी मुगलों के साथ भारत के जैचंद भी भारतियों के खिलाफ ही लड़ते थे, और इसी कारण ये मुग़ल 15वी सदी से लेकर 1857 तक दिल्ली और आसपास के इलाकों पर कब्ज़ा ज़माने में कामयाब हुए थे
आज भी भारत के जैचंद यानि सेक्युलर और वामपंथी तत्व इन मुगलों की चालीसा करते रहते है, अन्यथा इन मुगलों का इतिहास वाकई काफी शर्मनाक है
