गलती, 'मिलार्ड' के साथ-साथ हमारी भी है, आखिर हम भी दूध के धुले कब थे


★ मुफ्त का प्रसाद मिले, खड़े हो जाओ भीड़ में l ★ हज का पैसा मिले , खड़े हो जाओ भीड़ में l ★ बच्चा पैदा करने पर खैरात मिले, खड़े हो जाओ भीड़ में l ★ आरक्षण का टुकड़ा मिले, खड़े हो जाओ भीड़ में l ★ सरकारी खैरात मिले, खड़े हो जाओ भीड़ में l ★ मुफ्त का प्रसाद मिले, खड़े हो जाओ भीड़ में l

★ मुफ्त का राशन मिले, खड़े हो जाओ लाइन में l ★ पसंदीदा नेता भाषण पेले, खड़े हो जाओ रैली में l ★ आधे दाम पर कोई चीज मिले, खड़े हो जाओ धक्के खाने l ★ मैच आये, बैठने की जगह नही मिली, खड़े हो जाओ साइड में l ★ कोई सेलिब्रिटी आये, उसको देखने के लिए घंटों खड़े हो जाओ l ★ बाबाओं को सुनने के लिए खड़े हो जाओ सभा में l

★ मौलाना साहब ने सजा दी तो 4 घंटे खड़े हो जाओ धूप में l ★ मौलाना साहब की जुम्मे की तकरीर के लिए 1 घंटा खड़े हो जाओ मस्जिद में l ★ सुलभ शौचालय में भीड़ है, खड़े हो जाओ लाइन में l ★ मंदिर में दर्शन करने के लिए, खड़े हो जाओ लाइन में l ★ मूवी का टिकट लेने के लिए घंटों खड़े हो जाओ l ★ गर्लफ्रैंड के लिए आइस क्रीम लेने के लिए घंटों खड़े हो जाओ l

★ स्कूल-कॉलेज की असेंबली में प्रिंसिपल की बकवास सुनने के लिए खड़े हो जाओ l ★ बॉस के सामने खड़े हो जाओ l ★ यूनिवर्सिटी के बाहर लड़कियों को ताड़ने के लिए खड़े हो जाओ l

हम भारतीय हर काम खड़े-खड़े कर सकते हैं (बस वह सुबह वाला नहीं) लेकिन जब बात देश के सम्मान की आती है,राष्ट्रगान पर खड़े होने की आती है, तो हमें अपनी आजादी याद आ जाती है l भाड़ में गई ऐसी आज़ादी !!! अरे ! सारी आज़ादी मिली हुई है तुमको ??? फिर भी तुम्हे चंद सेकंड देश के सम्मान में खड़े होने में समस्या हो रही है ??? इससे अधिक देर तो टॉयलेट करने के बाद हाथ धोने से पहले फ़ोन खड़े होकर चला लेते हो l महान हो तुम !!! 

इस 'खड़े होने' के विरोध में सुप्रीम कोर्ट जाने वाला व्यक्ति, हम में से ही एक है lll तो गलती, 'सुप्रीम कोर्ट' के साथ-साथ हमारी भी है, हम दूध के धुले कब थे ???