दादी की समाधी पर जाते है, पर दादा की कब्र पर क्यों नहीं ? पहचान छुपानी है इसलिए !



अभी कुछ ही दिन पहले मोहनदास गाँधी के असल पड़पोते ने राहुल गाँधी को लिखित में कहा था की गाँधी नाम का इस्तेमाल अब बंद कीजिये, आप लोगों का गाँधी से कुछ लेना देना नहीं है, इस से असमंजस की स्तिथि बनती है, पर राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी जो असल में गाँधी है ही नहीं, वो गाँधी नाम का इस्तेमाल कर रहे है, खैर 

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अभी कुछ ही दिनों पहले 31 अक्टूबर का दिन था, राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी इंदिरा गाँधी की समाधी पर गए थे, दिल्ली के बीचों बीच इंदिरा गाँधी की समाधी 45 एकड़ जमीन पर बनी हुई है, हर साल इंदिरा गाँधी के जन्मदिवस और मरणदिवास पर राहुल गाँधी, प्रियंका वाड्रा, सोनिया गाँधी इत्यादि जाते है

पर हमारी समझ में एक चीज नहीं आती की राहुल गाँधी अपनी दादी की समाधी पर हर साल जाते है, कम से कम 2 बार तो जाते ही है, जन्मदिवस और मरणदिवास के दिन, पर अपने दादा से राहुल गाँधी को क्या नफरत है, क्यूंकि फिरोज खान की कब्र पर न राहुल गाँधी जाते है न प्रियंका वाड्रा जाते है न ही सोनिया गाँधी जाती है, दादी से प्यार पर दादा से नफरत, ये कुछ समझ नहीं आता 

मीडिया वाले आपको नहीं दिखाएंगे, पर आज हम आपको दिखाते है राहुल गाँधी के दादा फिरोज खान की कब्र, देख लीजिये नाम भी कन्फर्म कर लीजिये, हालाँकि उस शख्स का नाम फिरोज खान था, गाँधी ने फिरोज खान को कभी गोद नहीं लिया था, पर राजनीती के तहत फिरोज खान को कांग्रेस ने फिरोज गाँधी बना दिया, खैर देखिये राहुल गाँधी के दादा की असल कब्र 

Firoz Gandhi Tomb


देख लीजिये साफ़ तस्वीर है, नाम इत्यादि लिखा हुआ है, राहुल गाँधी के दादा की कब्र इलाहबाद शहर के माफोड़गंज में स्तिथ है, इसी कब्र के नीचे इंदिरा गाँधी के शौहर को मरने के बाद दफ़न किया गया था 

अब दादी की समाधी पर हर साल जाने वाले राहुल गाँधी दादा की कब्र पर क्यों नहीं जाते, इसका एक कारण हमे समझ आता  है, और वो कारण ये है की फिरोज खान के नाम से दुरी बनाकर रखना है, वरना फिर राहुल गाँधी की पहचान राहुल खान होने में अधिक समय नहीं लगेगा, और जहाँ राहुल खान की पहचान हो गयी, कांग्रेस की तो नैया ही डूब जाएगी, क्यूंकि जितना भी सेकुलरिज्म हो  भारत में पर जबतक हिन्दू बहुसंख्यक है, तबतक तो भैया राहुल गाँधी के रूप में ही घूमना पड़ेगा न