रावणों को मारने के लिए विभीषणों को जोड़ना पड़ता है, युद्ध में नैतिकता नहीं चलती



विभीषण ही जानते थे कि रावण को कैसे मारा जा सकता है ? इसलिए श्री राम लक्ष्मण ने उन्हें अपनी शरण में ले लिया और रावण वध में विभीषण बड़े काम के साबित हुए ।अच्छी बात थी लेकिन विभीषण ने करोड़ों का कोई चिट फण्ड घोटाला भी तो नहीं किया था न ? इसलिए जब वे राम लक्ष्मण की शरण में गए तो उन्हें राम लछमन ने चट्ट से अपनी शरण में ले लिया ।

अगर किया होता तो शायद नहीं लेते .... पर आजकल के राम , लछमन घोटालेबाजों से भी हाथ मिला रहे हैं क्योंकि उनको बंगाली रावण का वध करना है । अगर इस वध में किसी अलगाववादी की भी जरूरत पड़ी तो वे उनसे भी हाथ मिला सकते हैं । कश्मीरी रावण का वध करते समय तो ऐसा ही किया था । सत्ता सुख का नशा हर नशे से बड़ा है । नैतिकता और आदर्शवादिता दूसरों के लिए रख छोड़ी है। लादेन समर्थक एक बिहारी विभीषण ने फिर क्या बिगाड़ा था ? उस को क्यों निकाला शरणागत से ? शायद वह विभीषण बिहारी रावण का वध करने का सही तरीका नहीं जानता होगा इसलिए उसको तुरन्त बाहर का रास्ता दिखा दिया गया ।

सोच रहा हूँ एक चिटफण्ड घोटाला मैं भी कर दूं । जब सीबीआई का शिकंजा कसेगा तो फट से राम लछमन की शरण में चला जाऊंगा । फिर सीबीआई मेरा क्या बिगाड़ लेगी ? और राम लछमन तो बैठे ही हैं शरणागत को शरण देने के लिए क्योंकि वे रावण वध का सही तरीका नहीं जानते इसलिए विभीषणों की भर्ती चालू है ।

विभीषणों को पता होता है कि रावण के किस अंग में अमृत भरा है जिसकी वजह से वह अमर और अपराजित है । चिटफंडिये विभीषण राम लछमन को बताएंगे कि बंगाली रावण की नाभि में अमृत है या कहीं और पुराने विभीषण नैतिकता के चलते अपने भाइयों का साथ छोड़ देते थे पर आजकल के विभीषणों के अपने हित हैं और राम लछमन के अपने इसलिए जो दूसरों के लिए नैतिकता और आदर्शवादिता रख छोड़ी है , वह तो दूसरों के लिए ही है । अपनी दही को कौन खट्टी बताता है भई ? रावण का राज जानने के एवज में राम लक्ष्मण ने लंका शरण में आये विभीषण को सौंप दी थी 

आज नैतिकता है कहा साहब, नैतिकता के नाम पर बीजेपी इतने दिनों उत्तरप्रदेष में सत्ता से दूर थी। येन केन कैसे भी सत्ता चाहिए अगर बंगाल के हिन्दुओ को बचाना है तो। अगर नैतिकता की बात है तो फेसबुक पर हाय बंगाल के हिन्दू हाय बंगाल के हिन्दू करते रहिए और बंगालियों को गरियाते रहिये सत्ता रहेगी तभी कुछ होगा....कश्मीर में सत्ता में घुसे और अभी तक 100+ ठोक चुके हैं (अलगावबादी सकते में हैं सो अलग).... ममता बानो का काट तो कहीं न कहीं से निकालना ही पड़ेगा (तो यहीं से सही)..... जब सामने वाला नैतिक नही है तो हम क्यों हों!

मुकुय रॉय ही वो सरगना है जिसने अपने गुंडों के दम पर सीपीएम के वोटर को पोलिंग बूथ तक नही पहुंचने दिया और अब वही टीएमसी वोटर्स को बूथ तक पहुंचने से रोकेगा। जो हथियार मोमता ने कम्युनिस्टों के लिए इस्तेमाल किया वही भाजपा मोमता के लिए इस्तेमाल करेगी। इतिहास उसका होता है जो जितना जानता है ,किसी भी तरह। हारने वाले का न भविष्य होता है न इतिहास ।

आज के दौर में जब जंग छिड़ी हो और सामने ऐसी शक्तियां हो जो साम, दाम, दण्ड,भेद का प्रयोग करने में माहिर हो तो हमें उनकी रणनीति से ही लड़ना पड़ेगा। हमारी नैतिकता हमें कमजोर ही करेगी जब सामने शत्रु धूर्त,कपटी और छल बल वाला हो। काश पृथ्वीराज चौहान ने धूर्त गौरी को माफ करके जीवनदान ना दिया होता । शत्रु का मर्दन ही हमारे अस्तित्व को सुनिश्चित करती है।