मोदी मिले तो सूटबूट की सरकार, इंदिरा मिले डिनर करे तो गरीबों की मसीहा, वाह


कई बार दैनिक भारत के पाठक शिकायत करते है, की दैनिक भारत सेक्युलर पार्टियों के खिलाफ कड़े शब्दों का प्रयोग करता है, जो ठीक नहीं है, ऐसे पाठकों से हम भी पूछना चाहते है की अगर पीले को पीला कहें तो कौन सा अपराध है 

विपक्ष के लोग, खासकर सेक्युलर वामपंथी लोग इतने दोगले होते है, की हम तो सच ही लिखते है, कड़वाहट इनको खुद ही लगती रहती है, ममाता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल से हज़ारों किलोमीटर मुंबई जाकर मुकेश अम्बानी के घर जाकर मुकेश अम्बानी से मुलाकात की है, उन्होंने मुकेश अम्बानी के घर में डिनर भी किया 

ममाता का कहना है की वो बंगाल में वित्तीय कार्यक्रम करने वाली है, इसी लिए मुकेश अम्बानी को उस कार्यक्रम का निमंत्रण देने गयी थी, ममाता और अम्बानी पर आम आदमी पार्टी, कांग्रेस के लोग चुप है, इनके पास कहने को कुछ नहीं है 

पर अगर यही मोदी मुकेश अम्बानी से उसके घर तो छोड़िये, किसी भी आम जगह, किसी कार्यक्रम में मिल जाये, तो एहि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी, और तृणमूल कांग्रेस के लोग मोदी पर कहते है की ये तो आम आदमी की दुश्मन सर्कार है, ये तो अमीरों के एजेंट है, सूटबूट वाली सरकार है 

अगर ममाता अम्बानी से मिले तो बंगाल की भलाई के लिए मिली, पर अगर मोदी अम्बानी से कहीं मिल लें, तो मोदी गरीबों के दुश्मन हो जाते है, और जब हम विपक्षियों की इसी दोगलेपन के खिलाफ लिखते है, तो दैनिक भारत सांप्रदायिक हो जाता है, विपक्षी लोग इतने दोगले है की चिट भी इनकी और पट्ट भी इनका

 और सिर्फ ममाता बनर्जी ही क्या आप ऊपर की तस्वीर को देख सकते है, इंदिरा गाँधी जो कांग्रेस की नेता थी, कांग्रेस उन्हें गरीबों की मसीहा भी बताती है, वो भी अम्बानी से मिलती थी, आप तस्वीर में देख सकते है वो धीरूभाई अम्बानी के साथ डिनर कर रही है, जब ममाता बनर्जी अम्बानी से मिल सकती  है, इंदिरा गाँधी अम्बानी से मिल सकते है तो फिर नरेंद्र मोदी या कोई और नेता क्यों नहीं मिल सकता है 

अगर मोदी सूटबूट की सरकार है तो इंदिरा भी सूटबूट की सरकार थी, फिर कांग्रेस उन्हें गरीबों का मसीहा क्यों बताती है, कितने दिन चलेगा ये दोगलापन