कभी संघ प्रमुख कह देते है की भारत में रहने वाले मुसलमान भी हिन्दू है, इनके पूर्वज हिन्दू थे, और इनका धर्मांतरण हुआ है, तो ओवैसी टाइप के बहुत से कट्टरपंथी इस बात का विरोध करते है, और खुद को भारतीय नहीं अरबी बताने लगते है, चलिए 1 वक़्त को मान लेते है की ये भारतीय नहीं अरबी है
तो अरब में कौन सा इस्लाम मानवता की शुरुवात के समय से ही है, अरब में इस्लाम का कोई सबूत 1400 साल से पुराना नहीं है, इस्लाम का तो पूरा इतिहास ही 1400 साल पुराना है, पर अरब में ही 6000 साल पुराना हिन्दू धर्म का सबूत मौजूद है और ये खोज भी अरब के देश इराक में जाकर कोई हिन्दुओ ने नहीं बल्कि वही के मुस्लिम शोधकर्ताओं ने की है
अरब में खुदाई के दौरान गणेश जी की विशाल प्रतिमा जमीन से निकलने के बाद इराक में मिली भगवान् राम और हनुमान की 6000 साल पुरानी आकृति, इराक भले ही आज मुस्लिम देश हो, पर ये हमेशा से मुस्लिम देश नहीं रहा है, इराक का असल नाम "मेसोपोटामिया" है, सऊदी अरब की तरह इराक में भी हिन्दू धर्म ही फैला हुआ था और उसका सबूत भी इराक में मिला है
पहले आपको बता दें की अक्सर आपने देखा और सुना होगा की कट्टरपंथी दूसरे धर्म की मूर्तियों, आकृतियों को तोड़ देते है, असल में ये ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि दूसरे संस्कृति को मिटाया जा सके और झूठ फैलाया जा सके की इस्लाम सबसे पुराना है अब कोई सबूत ही नहीं छोड़ा जायेगा तो इस्लाम सबसे पुराना है कहने में आसानी होगी और इसी मकसद से दूसरे धर्म की मूर्तियों, आकृति को जिहादी तत्व तोड़ते है, और अक्सर उनपर मस्जिदें भी बना देते है
इराक में भी जिहादी तत्वों ने तमाम दूसरे धर्मो की आकृति को तोडा, उन्हें नष्ट किया पर अब शोधकर्ताओं को इराक के सुलेमानिया में हिन्दू धर्म के प्रतिक भगवान् राम और हनुमान की आकृति मिली है शोधकर्ताओं ने इस आकृति को 6000 साल पुरानी बताया है, यानि बनाने वालो ने इसे 6000 साल पहले इस सुलेमानिया में बनाया था, जबकि इस्लाम तो महज 1400 साल पुराना है साफ़ होता है की इराक में सनातन धर्म ही था
आकृति में साफ़ देखा जा सकता है की, एक पुरुष खड़े हैं जिनके हाथों में धनुष है, और उनके सामने एक वानर रूपी हनुमान हाथ जोड़े खड़े है, शोधकर्ताओं ने इसे हिन्दू धर्म के श्री राम और हनुमान के रूप में स्वीकार किया है, भारतीय ही नहीं अरबी मुस्लिम भी धर्मांतरित ही है, पर कहने को ये लोग कुछ भी कह सकते है
