विकास के मुद्दे पर बनारस 30वीं रैंक से पाहुचा सीधा चौथी पोजीशन पर, अमेठी और रायबरेली हालत पहले से हुई बदतर

banaras became smart city with narendra modi

अगर आप हिंदुस्तान के रहने वाले हैं तो आपके लिए गर्व की बात है क्योंकि विश्व का सबसे पुराना, हिन्दुत्व का प्रतीक, और अब स्मार्ट सिटी बन चुका है बनारस। अगर आप उत्तर प्रदेश से हैं तब तो आपको अपने पीएम पर नाज करना चाहिए , क्योंकि जिस बनारस की रैक 2014 में 88 थी उसकी रैंक 2016 में 30 हो गयी थी और अब मार्च  2018 के ताजा सर्वे के अनुसार विकास के मुद्दे में बनारस  चौथी पोजीशन पर पाहुच चुका है
जबकि सोनिया गांधी का संसदीय क्षेत्र रायबरेली और राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र अमेठी पहले से और भी बदतर हालत में पहुच चुका है, असल में जो जिले 136 रंक से ज्यादा होते हैं उनकी रंक निरधारित नहीं की जाती है तो आप सोच सकते हैं की रायबरेली और अमेठी की क्या हालतरही होगी जो उन्हे टॉप 136 में भी जगह नहीं मिली
खैर ये तो बात हुई रैंकिंग की लेकिन ये भी जान लीजिये की किन कारणो की वजह से बनारस स्मार्ट सिटी बन गया है

1-वायरलेस बनारस बनाने में मोदी रहे सफल-


smart city banaras

पहली और सबसे बड़ी बात ये है की बनारस अब पूरी तरह से वायरलेस हो चुका है मतलब पहले वाले बनारस में जनहा बिजली के कनेकसन तारो के जाल खंभे नजर आते थे तो अब बनारस में बिजली और तारों को पूर्ण रूप से भूमिगत कर दिया गया है,

2-बनारसी साड़ी और कपड़ा उद्योग का किया विस्तार-


मोदी की सबसे बड़ी कामयाबी यही रही की जिस काम के लिए बनारस जाना जाता था उसे मोदी वैशेक पटल पर उभार कर लेकर आए , और एक जमाना था की बनारसी साड़ी का लोग सिर्फ नाम जानते थे और आज है बनारसी साड़ी भारत के कोने कोने में भेजी जाती है और भारी मात्र में विदेशोने में भी एक्सपोर्ट की जाने लगी है

3-टूरिज़म को बढ़ावा दिया -


smart city banaras 2

बनारस हमेशा से टूरिज़म का क्षेत्र रहा है लेकिन पुरानी सरकारों ने इसके रख रखाव और सुरक्षा को नजर अंदाज किया जिससे बनारस में पक्षी भी पर नहीं मारते थे लेकिन 2014 के बाद जबसे मोदी बनारस के सांसद बने हैं तब से बनारस के टूरिज़म में जबर्दस्त उछाल देखने को मिली है, और एक कारण यह भी है की महादेव की नागरी में विदेशी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्रीयों को मोदी घुमाने जरूर जाते हैं जिससे फ्री में बनारस के टूरिज़म को प्रोमोटे किया जाता है इसे मोदी का ही दिमाग कहते हैं, क्योंकि अगर कोई सेलिब्रिटी प्रचार करता तब भी शायद इतना टूरिज़म डिपार्टमेन्ट को फाइदा नहीं होता और पैसे खर्च होते अलग से , शायद गुजराती दिमाग इसी को कहते हैं