तो कुछ लोगों को अयोध्या में राम मंदिर की जगह अस्पताल और स्कुल चाहिए, ये तमाम लोग देश के कुख्यात वामपंथी और सेक्युलर है, जो मंदिर की जगह स्कुल और अस्पताल चाहते है, वैसे इनको मस्जिदों और कब्रिस्तानों की जगह पर मस्जिद और कब्रिस्तान ही चाहिए, जमीन की बर्बादी तो सिर्फ बनाने से होता है
ये तमाम सेक्युलर और वामपंथी लोग दिल्ली में बैठते है, इसी दिल्ली में बिलकुल बीचों बीच, बहुत ही महँगी जमीनों पर 4 समाधियां बनी हुई है, जिसमे मोहनदास गाँधी की समाधी है जो की 44 एकड़ में बनी हुई है, जवाहर लाल नेहरू की समाधी है जो की 53 एकड़ में बनी हुई है, इंदिरा गाँधी की समाधी है जो की 45 एकड़ में बनी हुई है और राजीव गाँधी की समाधी है जो की 15 एकड़ में बनी हुई है
ये लोग इस देश के राजा नहीं थे, और न ही ये जमीने इनकी थी, पर कोंग्रेसियों ने दिल्ली के बीचों बीच इतनी भूमि पर सिर्फ इन 4 लोगों की समाधी बनवाई, अगर इस पुरे जमीन की कीमत की बात करे तो दिल्ली में प्रति एकड़ जमीन की कीमत 1500 करोड़ रुपए है, यानि मरने के बाद भी इन चार लोगों ने दिल्ली में 110145 करोड़ रुपए की जमीन पर कब्ज़ा किया हुआ है
और ये जमीने भी उस दिल्ली में है जहाँ जमीन की वैसे भी कमी है, जनसँख्या ज्यादा है दिल्ली की, जनसँख्या घनत्व दिल्ली में बहुत ज्यादा है, जिन लोगों को अयोध्या में मंदिर की जगह अस्पताल चाहिए, वो लोग इन चार लोगों की समाधियों की जगह अस्पताल और स्कुल क्यों नहीं मांगते, तो राम मन्दिर की जगह पर अस्पताल बनाने की राय देने वालो. पहले इन समाधियों की सिर्फ एक एकड़ में अस्पताल, स्कूल बनाओ, फिर आगे की बात करना
और आपकी जानकारी के लिए बता दें की इन सभी समाधियों में विशेष घांस उगाई जाती है, उसका रखरखाव किया जाता है, और इन चार समाधियों के रख रखाव पर ही हर साल 16 करोड़ रुपए जनता के टैक्स का 16 करोड़ उड़ा दिया जाता है, कब बंद होगी ये लूट
